देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। मंत्रालय अपने एसेट मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम के तहत आगामी वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों से होने वाली कमाई के लक्ष्य को 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य आधार 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BoT) मॉडल के तहत आने वाले प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश को शामिल करना है। इस नए बदलाव के लागू होने के बाद, वित्त वर्ष 2027 में हाईवे मॉनेटाइजेशन से कुल राजस्व प्राप्ति 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकती है, जो मंत्रालय के मौजूदा 35,000 करोड़ रुपये के शुरुआती लक्ष्य से काफी अधिक है।
मंत्रालय का यह कदम केंद्र सरकार के व्यापक 'नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन' (NMP) 2.0 फ्रेमवर्क के अनुकूल है, जो देश में ढांचागत परिसंपत्तियों के बेहतर वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा देता है। राष्ट्रीय मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन 2.0 के तहत वित्त वर्ष 2030 तक की पांच साल की अवधि में कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये की मॉनेटाइजेशन क्षमता का अनुमान लगाया गया है। इस विशाल लक्ष्य में केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) के तहत लगभग 5.8 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाने का खाका तैयार किया गया है।
इस नई नीति के अंतर्गत ग्रीनफील्ड एसेट्स, विशेष रूप से बीओटी (BoT) रूट से विकसित हो रहे नए हाईवे प्रोजेक्ट्स को शामिल कर सरकार निजी कंपनियों के लिए निवेश के नए रास्ते खोल रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से न केवल सरकार के खजाने में अतिरिक्त पूंजी आएगी, बल्कि टोल संचालन और राजमार्गों के रखरखाव में भी निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इस तरह मिलने वाली बड़ी धनराशि को देश के सुदूर इलाकों में नए एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों के निर्माण में पुनर्निवेश (Reinvest) किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की आर्थिक गति को नई रफ्तार मिलेगी।